-मार्च 2019 में भारत सरकार द्वारा जारी किया गया था मदरसा शिक्षकों का वेतन
-7 महीने से पत्रावली शासन में धूल फांक रही, पत्रावली को शासन-निदेशालय ने बना दिया फुटबॉल
-सरकार की ढीली पकड़ के चलते अधिकारी हो गए बेलगाम

विकासनगर। जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि उत्तराखंड के मदरसा शिक्षकों को भारत सरकार द्वारा एसपीक्यूईएम योजना के तहत 28 मार्च 2019 में वर्ष 2014-2015 की द्वितीय किश्त के रूप में में 57.60 लाख रुपए की किस्त जारी की गई थी, लेकिन शासन व निदेशालय में बैठे निकम्मे एवं गैर जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही से इन गरीब शिक्षकों को 7 माह बाद भी वर्ष 2014- 15 का वेतन आदि का भुगतान नहीं हो पाया।
मोर्चा कार्यालय में पत्रकारों से वार्ता करते हुए नेगी ने कहा कि गैर जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा पत्रावली को फुटबॉल की तरह घुमाया जा रहा है जिसके चलते पत्रावली शासन से निदेशालय व फिर निदेशालय से शासन में घूम रही है। प्रदेश के मदरसों में उच्च  गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान कराने की जाने की दिशा में भारत सरकार द्वारा इन शिक्षकों की तैनाती की गई थी, लेकिन तैनाती कर सरकार भूल गई, जिसके चलते इन शिक्षकों को भारी आर्थिक संकट से गुजरना पड़ रहा है। अगर संकट की बात करें तो इन गरीब शिक्षकों को वर्ष 2015 -16 से आज तक लगभग 5 वर्ष से वेतन नहीं मिला। नेगी ने कहा मुख्यमंत्री श्री रावत अगर गैर जिम्मेदार अधिकारियों पर लगाम नहीं कस सकते तो घर बैठ आराम फरमाएं। पत्रकार वार्ता में मदरसा शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष मो. इस्लाम, सरफराज, गुलशाद राव, प्रवीण शर्मा पिन्नी, सुशील भारद्वाज, सुरेंद्र आदि उपस्थित रहे।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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