देहरादून/श्रीनगर। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के इतिहास एवं पुरातत्व विभाग तथा देवभूमि विचार मंच के तत्वावधान में वैश्विक महामारी कोरोना, महामारी एवं प्राकृतिक विध्वंस पर अन्तर्राष्ट्रीय वेबिनार के दूसरे उत्तराखंड में पर्यावरण एवं वैलनेस के साथ-साथ योग और अन्य परंपरागत चिकित्सा व्यवस्था के संबंध में चर्चा की गई। द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र की अध्यक्षता उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डीपी त्रिपाठी ने की। प्रोफेसर त्रिपाठी ने प्रोफेसर बागड़ी को मुख्य वक्ता के रूप में उद्बोधन के लिए आमंत्रित किया। मुख्य वक्ता प्रोफेसर बागड़ी ने पर्यटन व्यवसाय को कोरोना महामारी के तहत होने वाली क्षति का आकलन करते हुए बहुत ही व्यवहारिक पक्ष सामने रखा और सुझाव दिया कि किस प्रकार से हम कम से कम नुकसान उठाकर इसको पीछे छोड़ते हुए पर्यटन व्यवसाय को संभाल सकते हैं l मुख्य रूप से जो हिमालय का चित्र है जहां पर कि अधिकांश क्षेत्र ग्रीन जोन में है। वहां पर हम उनकी जगह होमस्टे की व्यवस्था करें और सरल तरीके से पर्यटन को चालू रख सकते हैं । इसमें सावधानी रखनी होगी व समय समय पर इसका निरीक्षण किया जाए। प्रोफेसर बागड़ी की बात पर अगर गौर किया जाए तो निश्चित रूप से से पर्यटन व्यवसाय को लाभ पहुंचेगा इसके पश्चात प्रोफेसर पीके मंडल जो एनसीईआरटी नई दिल्ली में समाज विज्ञान विभाग के अध्यक्ष हैं उन्होंने उड़ीसा में किस प्रकार से महामारी आई और कैसे सरकार और शासन ने समाज को इस महामारी के दौरान सुरक्षित करने की कोशिश की , किस प्रकार समाज ने खुद अपना रास्ता बनाया, कैसे सरला दास जैसे महान आध्यात्मिक लेखक ने समाज को इन महामारियों से बाहर निकलने का रास्ता बताया इसका विस्तार से उल्लेख किया। इसी श्रृंखला में दूसरे प्रख्यात इतिहासकार चंडी नंदा किस प्रकार से महामारी के दौरान लोग एक दूसरे पर उंगली उठाते हैं और दोषी ठहराते हैं ,इसका निरूपण किया ।औपनिवेशिक समय में जब कॉलरा की महामारी फैली थी तो किस प्रकार से औपनिवेशिक शासन ने स्थानीय लोगों को जिम्मेदार ठहराया इस बात पर उन्होंने तथ्यों के साथ अपना प्रस्तुतीकरण दिया, इसी श्रृंखला में सिंगापुर से जुड़ी रोमा ने सिंगापुर की सरकार ने किस प्रकार से कोरोना महामारी के प्रकोप को कम से कम समाज को प्रभावित करने से बचाया विस्तार से वर्णन किया। किस प्रकार से सिंगापुर का नुकसान जनधन की हानि कम से कम हुई और किस प्रकार से सरकार ने कारगर उपाय अपनाए ,इस बात को विस्तार से बताया। द्वितीय सत्र भोजन अवकाश के बाद 2:30 बजे प्रारंभ हुआ जिसकी अध्यक्षता डीपी सकलानी और और तत्पश्चात प्रो अखिलेश रघुवंशी ने की। इसमें मुख्य वक्ता प्रख्यात मनोवैज्ञानिक प्रोफेसर एस के पांडे जीने विस्तार से कोविड 19 के अंतर्गत होने वाले मनोवैज्ञानिक प्रभाव और उनके बचाव के बारे में अत्यंत महत्वपूर्ण वक्तव्य दिया । उन्होंने अपने शोध में यह उजागर किया कि वास्तव में कोविड 19 के दुष्प्रभाव इतने अधिक नहीं हैं जितने कि प्रचारित किए जा रहे हैं । दूसरे सत्र के सत्राध्यक्ष प्रोफेसर अखिलेश रघुवंशी विश्वविख्यात पर्यावरणविद रहे। निदेशक हैं, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में जिनका एक विशिष्ट स्थान है। इसी दौरान डॉ मनोज ठाकुर सिंगापुर योग के विशेषज्ञ ने योग की विभिन्न प्रक्रियाओं एवं उससे पहुंचने वाले लाभ पर पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण दिया। प्रोफ़ेसर गिरजा पांडे उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में सोशल साइंस के संकायाध्यक्ष ने हिमालय क्षेत्र में महामारी का इतिहास और महामारी के दौरान समाज और सरकार और व्यवस्था की क्या क्या प्रतिक्रिया रही , इस पर विस्तार से अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। इस सत्र का आरंभ एवं समापन संयोजक प्रोफेसर दिनेश सकलानी ने किया उन्होंने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया और उन्हें धन्यवाद दिया उनके साथ उनकी संयोजन समिति के श्री मोहन नैथानी,डॉक्टर श्वेता वर्मा, डॉ नगेंद्र रावत, डॉ मनोज ठाकुर एवं प्रेम बहादुर सभी ने सहयोग किया। Post navigation पलायन रोकने को कैसे हो स्थानीय संसाधनों का विकास विषय पर ऑनलाइन परिचर्चा आयोजित कोविड 19: हरिद्वार में मिले 5 पॉजिटिव, मरीजों की संख्या 405 हुई