गोपेश्वर। चमोली जनपद मुख्यालय गोपेश्वर में शुक्रवार को आयोजित दिशा समिति की बैठक भाजपा की अंदरूनी राजनीति और बढ़ती गुटबाजी को लेकर चर्चाओं के केंद्र में आ गई। गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और दो विधायक शामिल नहीं हुए, जिससे संगठन के भीतर खींचतान की अटकलें तेज हो गई हैं। जानकारी के अनुसार केंद्र पोषित योजनाओं और विकास कार्यों की समीक्षा के लिए आयोजित दिशा समिति की बैठक में कर्णप्रयाग विधायक अनिल नौटियाल और थराली विधायक भूपाल राम टमटा अनुपस्थित रहे। सबसे खास बात यह रही कि दोनों विधायक बैठक स्थल से कुछ दूरी पर स्थित पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में मौजूद थे, लेकिन बैठक में शामिल नहीं हुए। सूत्रों के मुताबिक सांसद अनिल बलूनी निर्धारित समय से काफी देर बाद गोपेश्वर पहुंचे। इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष, दोनों विधायक और कई पार्टी कार्यकर्ता पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में उनके इंतजार में बैठे रहे। हालांकि, मुलाकात नहीं होने के बाद नाराजगी खुलकर सामने आती दिखाई दी। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में भाजपा के भीतर बढ़ती असहमति और गुटबाजी को लेकर चर्चाएं और तेज हो गईं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बद्रीनाथ उपचुनाव के दौरान पार्टी के भीतर जो असंतोष पनपा था, वह अब धीरे-धीरे सार्वजनिक रूप से सामने आने लगा है। संगठन और स्थानीय नेताओं के बीच सांसद अनिल बलूनी की कार्यशैली और पकड़ को लेकर लंबे समय से चर्चाएं चलती रही हैं। वहीं कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र भण्डारी को अनिल बलूनी का करीबी माना जाता है। इसके बाद से जिले की राजनीति में नए समीकरण बनने और पुराने नेताओं की नाराजगी बढ़ने की चर्चाएं भी लगातार होती रही हैं। बैठक में मौजूद बद्रीनाथ विधायक लखपत बुटोला ने पूरे घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद चमोली भाजपा में बढ़ते असंतोष और गुटबाजी को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। अब राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी आने वाले समय में संगठनात्मक मजबूती और चुनावी समीकरणों पर असर डालेगी। Post navigation उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद हलाला का पहला मामला दर्ज, पति समेत आठ पर मुकदमा अर्बन कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में बड़ा खुलासा, पांच के खिलाफ मुकदमा दर्ज