डॉ कमल किशोर डुकलान ‘सरल’

योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे आज पूरी दुनिया ने अपनाया है। शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और भावनात्मक मजबूती प्रदान करने वाली यह विधा आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों का प्रभावी समाधान मानी जाती है। बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है, ऐसे में नियमित योगाभ्यास स्वस्थ और सक्रिय जीवन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वर्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम “Healthy Ageing Through Yoga” अर्थात “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” रखी है। यह संदेश इस बात पर बल देता है कि बढ़ती उम्र में भी व्यक्ति शारीरिक रूप से सक्रिय, मानसिक रूप से सजग और सामाजिक रूप से जुड़ा रह सकता है।

योग और स्वस्थ वृद्धावस्था

उम्र बढ़ने के साथ शरीर में लचीलापन कम होने लगता है, मांसपेशियां कमजोर होती हैं और कई बार संतुलन बनाए रखने में कठिनाई आती है। योग के नियमित अभ्यास से शरीर की गतिशीलता और संतुलन को बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। कई शोधों में पाया गया है कि योग तनाव कम करने, नींद की गुणवत्ता सुधारने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।

शारीरिक स्वास्थ्य के लिए योग के लाभ

योग विभिन्न आसनों, प्राणायाम और ध्यान तकनीकों का समन्वय है। इसके नियमित अभ्यास से निम्नलिखित लाभ प्राप्त हो सकते हैं—

  • शरीर का लचीलापन बढ़ता है।
  • मांसपेशियों और जोड़ों की कार्यक्षमता बेहतर होती है।
  • संतुलन और समन्वय में सुधार होता है।
  • तनाव और चिंता को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
  • श्वसन क्षमता में सुधार हो सकता है।
  • नियमित शारीरिक गतिविधि की आदत विकसित होती है।

मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव

आज की व्यस्त जीवनशैली में मानसिक तनाव एक सामान्य समस्या बन चुका है। योग और ध्यान मन को शांत करने तथा एकाग्रता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। नियमित योगाभ्यास से व्यक्ति अपने विचारों और भावनाओं को बेहतर ढंग से नियंत्रित करना सीख सकता है। इससे आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को बढ़ावा मिलता है।

छात्रों और युवाओं के लिए भी उपयोगी

योग केवल बुजुर्गों के लिए ही नहीं, बल्कि छात्रों और युवाओं के लिए भी लाभकारी है। यह ध्यान केंद्रित करने, अनुशासन विकसित करने और मानसिक दबाव को कम करने में सहायक हो सकता है। यही कारण है कि कई शैक्षणिक संस्थानों में योग को सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में शामिल किया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का महत्व

हर वर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने और स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। योग दिवस का उद्देश्य लोगों को नियमित योगाभ्यास के लिए प्रेरित करना और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाना है।

स्वस्थ वृद्धावस्था केवल लंबा जीवन जीने का नाम नहीं है, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता और जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने का भी विषय है। योग एक ऐसी जीवनशैली प्रदान करता है जो शरीर, मन और भावनाओं के बीच संतुलन स्थापित करने में मदद कर सकती है। नियमित और सुरक्षित तरीके से किया गया योगाभ्यास व्यक्ति को अधिक सक्रिय, ऊर्जावान और संतुलित जीवन जीने की दिशा में प्रेरित करता है।

इस अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर योग को केवल एक दिन की गतिविधि न मानकर दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लेना चाहिए। स्वस्थ शरीर, शांत मन और सकारात्मक जीवन दृष्टि की ओर बढ़ने का यह एक सरल और प्रभावी कदम हो सकता है।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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