हरिद्वार/इंदौर। मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के विस्तार, कार्यकर्ताओं की गुणवत्ता और संगठनात्मक आत्ममंथन को लेकर दिए गए बयान पर संत समाज ने समर्थन व्यक्त किया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के नवनियुक्त अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी तथा अखाड़ा परिषद के मीडिया संयोजक करौली शंकर महाराज ने कहा कि किसी भी बड़े संगठन में समय-समय पर आत्मनिरीक्षण, समीक्षा और सुधार की प्रक्रिया आवश्यक होती है। उनके अनुसार, संगठन के प्रति अपनत्व रखने वाला व्यक्ति ही उसकी कमियों की ओर ध्यान आकर्षित करता है ताकि संगठन और अधिक सशक्त बन सके। संत समाज का कहना है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे विशाल संगठन ने दशकों तक राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया है। संघ के प्रारंभिक कार्यकर्ताओं ने त्याग, तपस्या, अनुशासन और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानकर कार्य किया, जिसके परिणामस्वरूप संगठन का व्यापक विस्तार हुआ। हालांकि, संगठन जितना बड़ा होता है, उसके सामने चुनौतियां भी उतनी ही बढ़ती हैं और ऐसे में आत्ममंथन की आवश्यकता स्वाभाविक हो जाती है। महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि किसी भी संगठन की प्रतिष्ठा उसके कार्यकर्ताओं के आचरण और व्यवहार से निर्मित होती है। यदि कहीं कोई शिकायत या विवाद सामने आता है तो संगठन के वरिष्ठ नेतृत्व को उस पर समय रहते निर्णय लेना चाहिए। समस्याओं को लंबे समय तक लंबित रखने से भ्रम और असंतोष की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि कैलाश विजयवर्गीय का बयान विरोध या आलोचना की भावना से नहीं बल्कि संगठन के प्रति आत्मीयता और सुधार की सोच के साथ दिया गया प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि संघ ने देश को अनेक समर्पित कार्यकर्ता दिए हैं और आज भी बड़ी संख्या में स्वयंसेवक समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सेवा कार्यों में लगे हुए हैं। ऐसे में यदि कोई वरिष्ठ कार्यकर्ता संगठन के भीतर सुधार और आत्ममंथन की बात करता है तो उसे सकारात्मक दृष्टि से देखा जाना चाहिए। करौली शंकर महाराज ने कहा कि आत्ममंथन किसी भी जीवंत संगठन की पहचान है। उन्होंने परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि जब परिवार में कोई कमी दिखाई देती है तो परिवार के सदस्य ही उसे दूर करने का प्रयास करते हैं। उसी प्रकार संगठन में भी कमियों को स्वीकार कर उन्हें दूर करने की दिशा में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्कृति, राष्ट्रवाद और सामाजिक मूल्यों को आगे बढ़ाने वाले संगठनों में निरंतर सुधार की प्रक्रिया चलती रहनी चाहिए। संत समाज का मानना है कि संगठनात्मक विस्तार के साथ नई चुनौतियां भी सामने आती हैं। ऐसे में कार्यकर्ताओं के संस्कार, चरित्र और व्यवहार पर निरंतर ध्यान देना आवश्यक है ताकि संगठन की मूल भावना और उद्देश्य अक्षुण्ण बने रहें। कैलाश विजयवर्गीय ने क्या कहा? कैलाश विजयवर्गीय ने RSS के विस्तार, कार्यकर्ताओं की गुणवत्ता और संगठनात्मक आत्ममंथन पर अपनी राय रखते हुए कहा कि संगठन के साथ-साथ अच्छे और संस्कारित कार्यकर्ताओं का निर्माण भी आवश्यक है। मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विस्तार बहुत तेजी से हुआ है और उससे जुड़ने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ी है। हालांकि उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि केवल संख्या बढ़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसे कार्यकर्ताओं का निर्माण भी आवश्यक है जो अपने आचरण, चरित्र और सेवा भाव से समाज के लिए आदर्श बन सकें। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद अनेक सरकारी अधिकारी और कर्मचारी स्वयं को संघ से जुड़ा बताने लगे हैं। कई लोग शाखा में जाने, संघ की गतिविधियों से जुड़े होने या पारिवारिक संबंधों का उल्लेख करते हैं। विजयवर्गीय ने संकेत दिया कि संगठन से वास्तविक जुड़ाव और उसके मूल्यों का पालन अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी विचारधारा और संगठन की वास्तविक शक्ति उसके कार्यकर्ताओं के व्यक्तित्व और व्यवहार से प्रकट होती है। यदि संगठन में अच्छे, संस्कारित और समाजहित के लिए समर्पित लोगों की कमी महसूस हो रही है तो इस विषय पर गंभीर आत्ममंथन किया जाना चाहिए। उनके अनुसार संगठन का विस्तार जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण उसके मूल आदर्शों, संस्कारों और कार्यपद्धति को मजबूत बनाए रखना भी है। संत समाज का संदेश संत समाज ने स्पष्ट किया कि संगठन की मजबूती केवल संख्या बल से नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं के चरित्र, अनुशासन और सेवा भाव से तय होती है। इसलिए किसी भी बड़े संगठन को समय-समय पर अपने कार्य, कार्यप्रणाली और कार्यकर्ताओं की समीक्षा करते रहना चाहिए। संतों ने कहा कि सुधार और आत्ममंथन को आलोचना नहीं बल्कि संगठन को और अधिक प्रभावी बनाने की प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। Post navigation स्वदेशी जागरण मंच ने संगठन विस्तार और स्वावलंबन पर किया गहन चिंतन