देहरादून। उत्तराखंड में इस बार मानसून के आगमन में देरी देखने को मिल रही है। जून का महीना समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, लेकिन प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अभी तक मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य में मानसून सामान्य समय से 7 से 10 दिन की देरी से पहुंच सकता है। आमतौर पर जून के तीसरे सप्ताह तक उत्तराखंड में मानसून की सक्रियता दिखाई देने लगती है। पहाड़ी क्षेत्रों में तेज बारिश, बादलों की आवाजाही और मौसम में बदलाव महसूस होने लगता है, लेकिन इस वर्ष स्थिति कुछ अलग बनी हुई है। कई इलाकों में लोग अभी भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। मानसून में देरी की क्या है वजह? मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के वैज्ञानिक रोहित थपलियाल के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में अनुकूल मौसमी तंत्र विकसित नहीं हो पाने के कारण मानसून की गति प्रभावित हुई है। उन्होंने बताया कि सामान्य परिस्थितियों में बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने से मानसूनी हवाओं को मजबूती मिलती है और वे तेजी से उत्तर भारत की ओर बढ़ती हैं। इस बार ऐसा सिस्टम समय पर विकसित नहीं हुआ, जिससे मानसून की प्रगति धीमी पड़ गई। मौसम विभाग का अनुमान है कि परिस्थितियां अनुकूल होने पर मानसून तेजी से आगे बढ़ सकता है और उत्तराखंड में सक्रिय हो जाएगा। पहाड़ों में बारिश का इंतजार उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कहीं-कहीं हल्की बारिश दर्ज की गई है, लेकिन इसे मानसूनी बारिश नहीं माना जा सकता। खेतों में नमी की कमी महसूस की जा रही है और कई क्षेत्रों में किसान अच्छी वर्षा का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, नदियों और गदेरों का जलस्तर फिलहाल सामान्य बना हुआ है। राज्य में अभी तक भारी बारिश या बाढ़ जैसी कोई गंभीर स्थिति नहीं बनी है। प्री-मानसून बारिश से मिली राहत मानसून की देरी के बावजूद प्री-मानसून गतिविधियों ने लोगों को गर्मी से कुछ राहत जरूर दी है। देहरादून में अधिकतम तापमान 34.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से थोड़ा अधिक रहा। बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम अपेक्षाकृत सुहावना बना हुआ है। हालांकि हरिद्वार और रुड़की जैसे मैदानी क्षेत्रों में तापमान अभी भी 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच रहा है। 28 जून तक बारिश और तेज हवाओं की संभावना मौसम विभाग के अनुसार आगामी दिनों में उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना बनी हुई है। 28 जून तक मौसम में बदलाव जारी रह सकता है। पर्वतीय इलाकों में कुछ स्थानों पर गर्जन के साथ बौछारें पड़ सकती हैं, लेकिन फिलहाल भारी बारिश या व्यापक आपदा जैसी स्थिति की संभावना नहीं जताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम विकसित होते ही मानसून की गतिविधियां तेज हो सकती हैं और राज्य में व्यापक बारिश शुरू हो सकती है। Post navigation विज्ञान के जरिये पहाड़ों से सितारों तक पहुंचे भद्री