हरिद्वार। जैन समुदाय का पावन पर्वराज पर्यूषण पर्व आज से प्रारंभ होकर निरंतर दस दिन तक चलेगा। इस अवसर पर पंचपुरी के समस्त जैन मंदिरों को भव्य रूप दिया गया। प्रातःकाल से ही मंदिरों में प्रभात फेरी, पूजन विधान, आरती व प्रवचन एवं संगीत समरोह आयोजित किए जा रहे। मुख्य कार्यक्रम श्री अहिंसा दिगंबर जैन मंदिर ललतारौ पुल में पमर पूज्य 108 आचार्य क्षमा मूर्ति विषुद्ध सागर महाराज सहसंघ के सानिध्य में सम्पन्न हो रहपा है। इस अवसवर पर सैंकडों जैन धर्मानुयायीयों ने भावपूर्वक भगवान का अभिषेक एवं विषेष पूजा अर्चना की।
आचार्य विषुद्ध सागर महारज ने कहा कि परिवार समाज राष्ट्र क्रोध की उत्पत्ति के परिणाम से विघटित हो जाते हैं तथा का्रेध सदैव विरोध और बैर को जन्म देता है। मोक्ष मार्ग की सबसे बडी बाधक क्रोध है। क्रोध की ज्वाला दूसरों को ही नहीं स्वयं को भी जला डालती है। आत्महत्या इसका सबसे प्रबल उदाहरण है इसलिए क्रोध को त्यागकर सबके प्रति क्षमाभाव धारण करो। मुनिश्री 108 विषाल सागर महारज ने कहार कि क्रोध वर्तमान ही नही भूत भविष्य को भी बिगाड देता है। क्रोध के कारण एक पल में ही हमारी प्रतिष्ठा धूल में मिल जाती है। क्रोध ही भविष्य की उन्नति में बाधक है। वह हमारी चिंतन शक्ति को नष्ट कर देता है तथा विकास के सथान पर विनाष प्रारंभ हो जाता है। संचलन बालेष जैन ने किया। इस अवसर पर विषेष रूप से अनिल जैन, प्रकाष कुमार जैन, संदीप जैन, मनोज जैन, रवि जैन, आनंद जैन, राकेष जैन, अमित जैन, विनय पोद्दार, राकेष पोद्दार, पियूष जैन, हंसकुमार जैन, नितेष जैन, पं पंकज जैन, वैभव जैन, समर्थ जैन, अभिषेक जैन, विपिन जैन, केषव दास जैन, सुधीर जैन, विजय जैन, मयंक जैन, पीसी जैन, धीरज जैन, मनीष जैन, प्रेमचंद जैन, ओमकार जैन, रजनीष जैन, सुरेष जैन, संजय जैन, आदेष जैन, रूचिन जैन, ओपी जैन, अषोक जैन, दिनेष चंद्रा, हिमांषु जैन, पीके जैन, सुरेन्द्र जैन,ख् पदम जैन, अरूण जैन, विमल जैन, अषोक जैन (बर्द्धमान), गजेन्द्र जैन, केडी जैन, विपुल जैन, नवीन जैन, रामगोपाल गुप्ता, वंषज जैन, विवके जैन, देवेन्द्र जैन, राजकुमार जैन आदि उपस्थित थे।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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