देहरादून। उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोकगायक हीरासिंह राणा, गीतकार, संगीतकार एवं कवि स्वर सम्राट हीरा सिंह राणा का अचानक दिल का दौरा पड़ने से शुक्रवार की रात 2:30 बजे दिल्ली में निधन हो गया है। वे 77 वर्ष के थे। वे आकाशवाणी और दूरदर्शन के उच्चकोटि के कलाकार रहे। लगभग 45-50साल पहले वे आकाशवाणी लखनऊ के उत्तरायण कार्यक्रम से जुड़े थे। सैकड़ों कवि सम्मेलनों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही। कुमाउनी लोकगीत परंपरा को उन्होंने ऊंचाई दी। कला और साहित्य के लिए हरदम समर्पित इस पुरोधा के चले जाना अपूरणीय क्षति है। हीरा सिंह राणा गढ़वाली कुमाऊनी और जौनसार भाषा अकादमी दिल्ली के उपाध्यक्ष भी रहे हैं। उत्तराखंड की संस्कृति के ध्वजवाहक हीरा सिंह राणा लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उन्होंने जीवन भर लोक संस्कृति को जीवंत रखने और इसके संरक्षण पर काम किया। वह हमारे पहाड़ की लोक आवाज़ थे। उन्होंने अंतिम सांस तक लोक संस्कृति के लिये काम किया। उनके निधन से उत्तराखंड को अपूरणीय क्षति हुई है।
इनके निधन से उत्तराखंड कला जगत के लिए बहुत बड़ी क्षति पहुंची है। हीरा सिंह राणा कुमाऊ ही नहीं गढ़वाल में भी बहुत लोकप्रिय थे। उनके निधन से शोक की लहर दौड़ पड़ी है। राज्य की संगीत प्रेमियों ने दुख व्यक्त किया है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, पूर्व मुुख्यमंत्री हरीश रावत, बद्रीनाथ के विधायक महेंद्र भट्ट, लोक गायक नरेेन्द्र सिंह नेेगी, पत्रकार एवं राज्य आंदोलनकारी योगेश भट्ट तथा राजनीतिज्ञों और संस्कृति कर्मियों ने हीरासिंह राणा के निधन को अपूूरणी क्षति बताते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।