नई दिल्ली (हि.स.)। भारतीय रेलवे ने अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ ही माल ढुलाई को प्रोत्साहित करने के लिए मालभाड़े में रियायत देने सहित कई अहम उपायों की घोषणा की। इससे होने वाले राजस्व घाटे की भरपाई रेलवे मात्रा बढ़ाकर करेगा।

रेलवे बोर्ड के सदस्य (यातायात) पी के मिश्रा ने गुरुवार को यहां रेल भवन में संवाददाताओं से कहा कि उद्योग जगत के विभिन्न हिस्सों को समर्थन करने के लिए इन उपायों की घोषणा की जा रही है।

उन्होंने कहा कि इसके तहत व्यस्त सीजन शुल्क की लेवी को स्थगित किया गया है। 1 अक्टूबर से 30 जून के बीच 15 फीसदी की दर से व्यस्त सीजन शुल्क की वसूली की जाती है, जिसे अगले आदेश तक स्थगित किया गया है। हालांकि कच्चा लोहा, अयस्क और पीओएल इसमें शामिल नहीं होगा। कोयला एवं कोक तथा कंटेनर यातायात को पहले से छूट मिली हुई है।

मिश्रा ने कहा कि छोटे और दो अंकों के रेकों पर लदान पर लागू 5 फीसदी पूरक शुल्कों को हटाया जा रहा है। इससे छोटे आकार के कार्गो के लदान को बल मिलेगा और सीमेंट, इस्पात, खाद्यान्न और उर्वरकों की लदान बढ़ेगी।

कंटेनर यातायात पर राउंड-ट्रिप शुल्क की योजना के तहत, 0 से 50 किलोमीटर स्लैब के प्रत्येक मार्ग के लिए शुल्क निर्धारण के स्थान पर, दोनों तरफ की आवाजाही के लिए 0-100 किलोमीटर स्लैब के लिए हॉलेज शुल्क वसूल किया जाएगा। इससे संपूर्ण राउंड ट्रिप के लिए प्रति टीईयू लगभग 35 फीसदी सस्ता हो जाएगा। इससे बंदरगाहों और अंतर्देशीय कंटेनर डिपों के बीच आयात-निर्यात यातायात को विशेष रूप से बल मिलने की आशा है। इसके अलावा खाली कंटेनरों के हॉलेज पर लगने वाले शुल्क में एक चौथाई की कमी की गयी है। रेलवे ने पूरे देश में 1 अगस्त से रेलवे की रसीदों का इलेक्ट्रॉनिक विधि से प्रेषण (ईटीआरआर) की सुविधा शुरू कर दी है, जिससे कागज ले जाने की जरूरत खत्म हो गई है।

हिन्दुस्थान समाचार

By उत्तराखंड संवाद भारती

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