देहरादून। यूकेडी के केंद्रीय प्रवक्ता सुनील ध्यानी ने कहा कि राज्य की त्रिवेंद्र की सरकार के इन तीन वर्षों में ऐसा लगा कि उच्च न्यायालय सरकार को चला रहा है। सरकार के गलत फैसले व निष्क्रियता पर उच्च न्यायालय को संज्ञान लेकर लगातार चेतावनी देनी पड़ रही है। उच्च न्यायालय द्वारा त्रिवेंद्र सरकार को एक बार पुनः फटकार लगाते हुए इस कोरोना महामारी में में क्वारन्टीन सेंटरों की अव्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट कहा कि क्वारन्टीन सेन्टरों को जो ग्राम प्रधानों की हवाले किये गए है उनके लिये बजट की व्यवस्था सुचारू करें। बार-बार सरकार को क्वारन्टीन सेन्टरों की दुर्दशा पर चेताने के बावजूद सरकार मानने को तैयार नहीं थी, आखिर न्यायालय द्वारा संज्ञान लिया गया।
उत्तराखंड के काबीना मंत्री सतपाल महाराज जो कोरोना की चपेट में परिवार व स्टाफ के साथ एम्स ऋषिकेश में है उनके द्वारा कोरोना की गाइडलाइंस का पूरा उल्लंघन होने के बावजूद सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक द्वारा क्लीन चिट सतपाल महाराज को दी जा रही है जबकि सतपाल महाराज व परिवार के सदस्यों ने कहीं न कहीं कोरोना बीमारी लक्षणों व ट्रैवलिंग हिस्ट्री छुपायी गयी है। इसलिये सरकार को उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करना चाहिये। गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के लिये एक याचिका पर निर्णय देते हुये स्पष्ट किया है कि यह नीतिगत मामला है। विस सत्र में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा की गयी जो कि घोषणा है, जबकि न कैबिनेट व सदन में कोई चर्चा को गयी व न कोई प्रस्ताव सरकार की ओर से पेश किया गया। केवल सरकार की अपनी अकर्मण्यता व अन्य मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिये गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की बात मुख्यमंत्री द्वारा कह दी गयी है। गैरसैंण पर भाजपा कॉग्रेस दोनों राजनीति कर बरगला रही है। उक्रांद गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के संकल्प को 1992 में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के नाम पर आज भी कटिबद्ध है तथा उक्रांद ही गैरसैंण को राज्य की स्थायी राजधानी बनायेगी।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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