हल्द्वानी। बरसात के चैमास में हर साल बाजार मंदी के दौर से गुजरता है। लेकिन नवरात्र शुरू होते ही व्यापारियों के चेहरे खिल जाते हैं। हालांकि इस दौरान व्रत करने वाले मेवे, पूजन सामग्री व कपड़ों की खरीददारी मुख्य रूप से करते हैं। इस बार मेवे के दामों की गर्मी ने उपभोक्ताओं के पसीने छुड़ा दिये।
कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान से मेवों का आयात बंद हो गया था। उसी समय थोक और खुदरा व्यापारियों ने गोदाम में स्टाक किये मेवों के दाम डेढ़ गुना तक बढ़ा दिये थे। सरकार ने जमाखोरों पर छापामारी करके दाम बढ़ाने से रोका नहीं और अन्य देशों से आयात करके दाम गिराने का आश्वासन दिया था। कई माह बीत जाने के बाद भी दाम नहीं गिरे। नवरात्र में व्रत करने वाले मेवे फलाहार के रूप में खाते हैं। थोक दर के अनुसार मखाना 660, गोला 220, किशमिश 280, काजू 800, बादाम 720, चिलगोजा चार हजार, छोटी इलायची 4700, अखरोट 900 रुपये प्रति किलो है। यह सभी मुख्य बाजार में खुदरा व्यापारियों द्वारा 20 से 25 प्रतिशत अधिक दाम पर बेचे जा रहे हैं, लेकिन हल्द्वानी महानगर के ग्रामीण क्षेत्र में विकसित कालोनियों की दुकानों पर थोक से डेढ़ और दो गुने दाम पर सभी मेवे बिक रहे हैं। नवरात्र में पूजन व फलाहार के लिए मजबूरी में किसी भी दाम पर लोगों ने मेवे खरीदे। लेकिन दीपावली पर मेवे के गिफ्ट पैक खरीदने से पहले लोगों को सोचना पड़ेगा। हल्द्वानी के मुख्य सदर बाजार के कई व्यापारियों ने बताया कि दीपावली पर मेवे के साथ अन्य उपभोक्ता वस्तुओं के दामों में और उछाल आ सकती है। उपभोक्ताओं का कहना है कि सरकार महंगाई के मोर्चे पर पूरी तरह विफल साबित हुई है।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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