टिहरी/देवप्रयाग । एक ओर से जहां सरकार कोरोना महामारी को रोकने के लिए कई प्रकार के कार्य कर रही है। वहीं कुछ स्वास्थ्य कर्मचारियों की लापरवाही से लोगों की जान जोखिम में पड़ती नजर आ रही है। तीर्थनगरी देवप्रयाग में स्वास्थ्य कर्मचारियों की ओर से कोरोना के बचाव के लिए पहनी जाने वाली पीपीई किट को खुले में फेकने का मामला प्रकाश में आया है।
तीर्थनगरी देवप्रयाग क्षेत्र में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ने का सिलसिला लगातार जारी है। कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए नगर स्थित बदरी केदार धर्मशाला को क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया है। जहां बाहरी क्षेत्रों से आ रहे लोगों को क्वारंटाइन किया जा रहा है। इनमे अभी तक 4 लोग कोरोना पॉजिटिव भी निकल चुके हैं। लोगों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए स्वास्थ्य कर्मचारियों को भी क्वारंटाइन सेंटर में तैनात किया गया। स्वास्थ्य टीम बदरी केदार धर्मशाला में क्वारटीन लोगो की जांच को पहुंची। इस दौरान स्वास्थ्य कर्मचारियों ने खुद पहनी पीपीई किट को वापस लौटते समस धर्मशाला के उसी रास्ते पर उतारकर फेंक दिया। इस रास्ते पर प्रतिदिन नगर के सैकड़ों लोगों का आवागमन होता है। संगम व्यू प्वांइट के नीचे फेंके गए यह पीपीई किट हवा में उड़ कर पास के घरों की ओर भी चले गए। स्वास्थ्य कर्मचारियों की इस लापरवाही नगरवासियों में इसको लेकर खासा रोष बना है। नगर वासियो के अनुसार प्रशासन की ओर से नगर के बीच मे पहले तो क्वारन्टीन सेंटर बना दिया गया है, फिर इस तरह की लापरवाही से लोगों के स्वास्थ्य से खुला खिलवाड़ किया जा रहा है। लोगों ने नगर से क्वारटीन सेंटर हटाने जाने तथा रास्तों में फेकी गयी पीपीई कीट का निस्तारण कर पूरे रास्ते को सैनिटाईज किए जाने की मांग की है। वहीं सीएचसी देवप्रयाग प्रभारी डॉ. सतीश कुमार का कहना है कि पीपीई किट को टीम ने नदी पार सुरक्षित स्थान पर जलाकर नष्ट कर दिया था। कुछ लोगों द्वारा बनाये गए वीडियो से यह लग रहा है कि पीपीई किट को वहीं छोड़ दिया गया है। नगर पालिका की टीम भी उस स्थान पर भेजी गयी, जिससे संदेह की कोई गुंजाइश न रहे। पीपीई किट को पूरी तरह नष्ट किया जाता रहा है इसमें लापरवाही किये जाने का सवाल ही नहीं बनता है।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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