विकासनगर। जौनसार-बावर क्षेत्र में बूढ़ी दिवाली के दूसरे दिन तड़के होलड़े जलाने के बाद गांवों में लोक नृत्य की अनूठी छटाएं देखने को मिली। बिरुड़ी के दिन गांव के स्याणा ने पंचायती आंगनों में अखरोट बिखेरे। जिन्हें ग्रामीणों ने प्रसाद स्वरूप ग्रहण किया। जौनसार के ठाणा, टुंगरा, रिखाड़, बिरमऊ, नगऊ, माक्टी, नागथा, बिसोई, मंगरौली, क्वारना, डकियारना, लोरली, कोरूवा, सैंज, उद्पाल्टा, क्यावा, निथला, बिसोई, हयोटगरी, अस्टाड, सरा, देऊ, अतलेऊ, डिमऊ, कोटा, सुपऊ, दातनू, साहिया, कालसी आदि गांवों में बूढ़ी दिवाली का दूसरा दिन बड़ी होलियात और बिरुड़ी के रूप मनाया गया।
ग्रामीणों ने पंचायती आंगन में हारुल, तांदी, झेंता आदि लोक गीतों और वाद्ययंत्रों पर थिरकते हुए जमकर पर्व का लुत्फ उठाया। प्रातकाल ग्रामीणों ने गांव के समीप एकत्र होकर भीमल की लकड़ी से बनाये होलड़े जलाये। इस दौरान ग्रामीण महिला पुरुषों ने लोक गीतों पर जमकर नृत्य करते एक दूसरे को पर्व की बधाईयां भी दी। इसके बाद हर गांव में देवता मंदिर या पंचायती आंगनों में ग्रामीण एकत्र हुए। जहां गांवों के स्याणाओं ने छत पर खड़े होकर अखरोट बिखेरे। जिन्हें ग्रामीणों ने प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। उधर, पर्व पर विशेष रूप से तैयार किए जाने वाले व्यंजन के साथ घर-घर में दावतों का दौर भी जारी है। हर परिवार व नाते रिश्तेदार एक दूसरे के घर पहुंचकर दावतों का लुत्फ उठा रहे हैं। जौनसार क्षेत्र में चल रही बूढ़ी दिवाली पर नाच गाने व दावतों के साथ देव दर्शनों का सिलसिला भी जारी है।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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