देहरादून। राजधानी देहरादून में 2 दिन पूर्व दिल्ली से इलाज करा कर लौटी आदर्श बिहार निकट 6 नंबर पुलिया देहरादून रिंग रोड निवासी महिला की पॉजिटिव रिपोर्ट आई थी। महिला के साथ रहने वाले उसके बेटे की भी आज कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आई है। ज्ञात हो कि हेल्थ डिपार्टमेंट की टीम दोनों मां-बेटे को साथ ले गई थी। मां का इलाज एम्स ऋषिकेश में चल रहा है जबकि बेटे को सीमा डेंटल हॉस्पिटल मैं क्वॉरेंटाइन किया गया था जिसकी आज पॉजिटिव रिपोर्ट आई है। प्रदेश में अब तक कुल कोरोना मरीजों की संख्या 79 हो गई है जिसमें से 50 मरीज स्वस्थ हो गए हैं।
उत्तराखंड में गुरुवार को छह और कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं। बीते एक हफ्ते में जितने भी मरीज सामने आए हैं वे सब बाहरी राज्यों से आए थे। बुधवार को भी राज्य में तीन संक्रमित मिले थे। जो दूसरे राज्य से उत्तराखंड आए थे।
जैसी कि संभावनाएं जताई जा रही थी कि प्रवासियों की वापसी के साथ राज्य में कोरोना संक्रमण तेज गति से बढ़ेगा, उसके प्रमाण अब सामने आने लगे है। दिल्ली और मुम्बई से लौटे प्रवासियों के कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि से यह साफ हो गया है कि अब राज्य का कोई भी हिस्सा इससे अछूता रहने वाला नहीं है। क्योंकि घर वापस लौटने वाले अधिकांश प्रवासी पहाड़ के गांवो के रहने वाले है।
राज्य में अब कोरोना संक्रमितों की संख्या अब 79 तक पहुंच चुकी है। खास बात यह है कि बीते एक सप्ताह में 16 नये मामले सामने आये है और यह सभी लोग बाहर से आने वाले है। राज्य में पहला केस 15 मार्च को सामने आया था। डेढ़ माह में राज्य में सिर्फ 60 के करीब मामले आये थे लेकिन अब एक सप्ताह में 16 मामले सामने आ चुके है। यह स्थिति तब है जब पहाड़ से लौटने वालों का टेस्टिंग न के बराबर है। अगर इन सभी का टेस्ट किया जाये तो बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हो सकते है। राज्य के अगर उन नौ पर्वतीय जिलों में जिन्हे ग्रीन जोन में रखा गया है का सेम्पलिंग रेट औसतन डेढ़ फीसदी है जो चैकांने वाला है। कई जनपद तो ऐसे भी है जहां अब तक सिर्फ एक या दो लोगों का ही टेस्ट हुआ है। बीते दिनों मुख्यमंत्री ने यह आंशका जताई थी कि आने वाले 2 लाख प्रवासियों में 25 हजार संक्रमित हो सकते हैं। लेकिन सवाल यह है कि जब राज्य के पास इतनी बड़ी संख्या में बीमारों का इलाज कराने की सुविधांए उपलब्ध नहीं है तो फिर क्या होगा? वहीं अगर संक्रमण गांवो तक पहुंचा तब क्या स्थिति होगी। संक्रमित मिलने वाले प्रवासियों के सम्पर्क में आने वालों की तलाश कैसे होगी? इन सवालोें को लेकर अब शासन-प्रशासन हैरान और परेशान है।




