उत्तराखंड

कैंसर के इलाज के दौरान अंगों की हिफाजत करना है नया लक्ष्यः आरजीसीआईआरसी

देहरादून। कैंसर के इलाज के दौरान मरीज के प्रभावित अंग को काटना या उसकी गतिविधि पर दुष्प्रभाव पड़ना होना बेहद आम बात रही है। लेकिन अब नई तकनीकों की मदद से प्रभावित अंगों व उनकी गतिविधियों की हिफाजत कर पाना एवं मरीज के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर कर पाना संभव है। हालांकि ऐसा होने के लिए जरूरी है कि कैंसर की जांच शुरुआती स्टेज में हो जाए। यह कहना है कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (आरजीसीआइआरसी) के दो वरिष्ठ चिकित्सकों डॉ. सुमित गोयल और डॉ. कुंदन सिंह चुफाल का। दोनों चिकित्सक इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) द्वारा आयोजित स्थानीय चिकित्सकों के कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे।
आरजीसीआईआरसी के मेडिकल ओंकोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. सुमित गोयल ने कहा, “कैंसर के ज्यादातर मामले इलाज के लिए काफी देर से सामने आते हैं। यह देरी कैंसर के इलाज को मुश्किल और खर्चीला बना देती है। हम यहां सहारनपुर में स्थानीय चिकित्सकों से चर्चा करने और कैंसर के लक्षणों को शुरुआती स्तर पर ही समझ सकने की जरूरत के बारे में विमर्श करने आए हैं। ऐसा होने से सही समय पर सही इलाज शुरू करना संभव हो सकता है।“ किन लक्षणों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए, इस संबंध में डॉ. गोयल ने कहा कि लगातार 3-4 हफ्ते तक खांसी का आते रहना, आवाज भारी होने लगना, अचानक से वजन कम होने लगना, किसी सूजन या गांठ का आकार बढ़ते जाना, कुछ गटकने में परेशानी होना और शरीर के किसी भी हिस्से से बिना कारण खून बहने लगना आदि कुछ ऐसे लक्षण हैं, जिन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए और तत्काल कैंसर की जांच करानी चाहिए।
आरजीसीआईआरसी के रेडिएशन ओंकोलॉजी सीनियर कंसल्टेंट डॉ. कुंदन सिंह चुफाल के मुताबिक, “अंगों की हिफाजत करने और जीवन की गुणवत्ता सुधारने में विभिन्न टार्गेटेड रेडिएशन थेरेपी बहुत अहम भूमिका निभा रही हैं। पुरानी तकनीकों में प्रभावित अंग रेडिएशन के कारण जल जाता है, लेकिन अब आईएमआरटी, आईजीआरटी और एसबीआरटी जैसी तकनीकों की मदद से आसपास के हिस्से को प्रभावित किए बिना सीधे कैंसर की गांठ को निशाना बनाना संभव हुआ है।“डॉ. चुफाल ने बताया कि फेफड़े जैसे लगातार हिलते रहने वाले अंगों के लिए टार्गेटेड थेरेपी आसान नहीं रही है। हालांकि अब जीएटीईडी रेडियो थेरेपी उपलब्ध है, जिसमें गति के हिसाब से ही रेडिएशन कैंसर के ट्यूमर को निशाना बनाता है। यह कुछ वैसा ही है जैसे कोई मिसाइल किसी लक्ष्य के पीछे छोड़ दी गई हो। इसमें 4डी प्लानिंग करनी होती है। 4डी सिटी स्कैन भी इसका हिस्सा है। आरजीसीआईआरसी जैसे उन्नत कैंसर इलाज केंद्रों पर यह सुविधा उपलब्ध है।

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