देहरादून (हि.स.)। अब उत्तराखंड भी एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन) लागू करने का मन बना रहा है। इसका कारण यहां भारी संख्या में बांग्लादेशियों, रोहिंग्याओं का ठिकाना होना है। नालो-खालों तथा मलिन बस्तियों के साथ-साथ कई अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में अपने घर बना लिए हैं तथा आसानी से रह रहे हैं। उत्तराखंड ऐसे लोगों का आसान लक्ष्य (साफ्ट टारगेट) रहता है, जिसके कारण यहां समस्याएं बढ़ी है। पुलिस जांच में भी ऐसे लोग पकड़ में नहीं आए लेकिन इस मामले पर सरकार सख्ती दिखाने वाली है। मुख्यमंत्री ने सोमवार को इस संदर्भ में जानकारी दी। असम में यह पहले से ही लागू है। हरियाणा सरकार ने भी एनआरसी लागू करने की बात कही है। अब उत्तराखंड में भी एनआरसी लागू करने पर विचार किया जा रहा है। सोमवार को मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि सीमांत क्षेत्र होने के कारण यहां एनआरसी लागू होना जरूरी है जिससे ऐसे लोग पकड़ में आएंगे जो दूसरे देशों से आकर यहां बस गए हैं और अपना कारोबार संचालित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि असम का यह प्रावधान सभी राज्य के लिए मार्गदर्शन का काम कर रहा है। असम की तरह उत्तराखंड में भी एनआरसी लागू किए जाने की आवश्यकता है। इस संदर्भ में वह मंत्रिमंडलीय सहयोगियों से मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा कर इसे लागू करने का प्रयास करेंगे ताकि उत्तराखंड से उन विदेशियों को हटाया जाए जो राज्य के संसाधनों पर काबिज हैं। एनआरसी के माध्यम से विदेशी नागरिकों की पहचान हो जाएगी इससे भारतीय नागरिक और अप्रवासी नागरिकों की पहचान के बाद उन्हें बाहर भेज दिया जाएगा। केंद्र सरकार ने 1986 में सिटीजनशिप एक्ट में संशोधन कर असम के लिए विशेष प्रावधान किया था लेकिन सीमांत क्षेत्र उत्तराखंड भी एनआरसी लागू कर भारतीय लोगों के अधिकारों की संरक्षा का प्रयास करेगा। हिन्दुस्थान समाचार Share on FacebookPost on XFollow usSave Post navigation पूर्व सैनिक एवं अर्द्धसैनिक संयुक्त संगठन की नई कार्यकारिणी गठित बिजली की लाइनों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पुख्ता व्यवस्था करने के निर्देश दिए