उत्तराखंड

आवाजाही के लिए पास बनना बना आम आदमी के लिए चुनौती

टिहरी। उत्तराखंड का सिस्टम भी अजीब है। यूपी का एक विधायक सख््त लॉकडाउन के बीच 3 गाड़ियां भरकर देहरादून आता है और अफसर सारे नियम ताक पर रखकर उसे काफिले समेत बदरीनाथ-केदारनाथ जाने का पास जारी कर देते हैं। लेकिन उत्तराखंड के अंदर ही एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए आम आदमी को जूते घिसने पड़ रहे हैं। टिहरी में लोग पास जारी करने के सिस्टम से परेशान हैं और समझ नहीं पा रहे कि क्या करें। दूसरी तरफ कुछ लोगों को हर दूसरे दिन पास मिल जा रहा है और वह आराम से घूम रहे हैं। इससे कोरोना फैलने का खतरा भी बना हुआ है। नई टिहरी जिला मुख्यालय में पास बनाने के लिए लोग सुबह से एसडीएम ऑफिस के बाहर खड़े हो जाते हैं और आवेदन करते हैं लेकिन ज्यादातर लोगों को निराश ही लौटना पड़ रहा है। कुछ लोग ऑनलाइन आवेदन कर रहे हैं लेकिन इंटरनेट की दिक्कत या अन्य कारणों से यह भी काम नहीं कर रहा। दूसरी और कुछ लोगों को आए दिन पास मिल रहे हैं और वे देहरादून, दिल्ली, यूपी और राजस्थान तक जा रहे हैं। स्थानीय निवासी भूपेंद्र सिंह रावत का कहना है कि वे अपने रिश्तेदार को छोड़ने के लिए देहरादून जाना चाहते हैं लेकिन ऑनलाइन पास बार-बार रिजेक्ट हो रहा है। एसडीएम ऑफिस में आवेदन करने पर तीन दिन बाद भी पास नहीं बन पाया है। वहीं एक टैक्सी ड्राइवर है जो लगातार अपनी सेटिंग के बूते पास बनवा रहा है।.भूपेंद्र कहते हैं कि नई टिहरी जिला मुख्यालय के कुट्ठा गांव का एक टैक्सी चालक दिल्ली और राजस्थान लगातार बुकिंग पर जा रहा है और वापस लौटने पर क्वारन्टीन भी नहीं हो रहा है। इसकी वजह से आस-पास रहने वाले लोगों में दहशत का माहौल है। इस पूरे मामले में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं तो एसडीएम सदर के सामने यह सवाल रखे. एसडीएम सदर फींचाराम चैहान ने कहा कि जरूरी होने पर ही लोगों के पास बनाए जा रहे है और एक ही दिन का पास दिया जा रहा है। अगर कोई दो या उससे अधिक दिन का पास बनाता है तो उसे वापस लौटने पर क्वारन्टीन किया जा रहा है। कुठ्ठा गांव के टैक्सी चालक के मामले से उन्होंने अनभिज्ञता जताई और कहा कि अगर कोई लगातार पास बनवाकर दिल्ली और राजस्थान जा रहा है तो इस मामले का संज्ञान लिया जाएगा और जांच की जाएगी।

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