उत्तराखंड

बिजली की लाइनों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पुख्ता व्यवस्था करने के निर्देश दिए

देहरादून। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने विद्युत लाईनों को ठीक करते हुए होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पुख्ता व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। इन दुर्घटनाओं के प्रभावितों को तुरंत मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। बिजली चोरी को रोकने के लिए उच्च अधिकारी भी फील्ड में जाएं। सौर ऊर्जा व पिरूल आधारित ऊर्जा परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए सिंगल विंडो सिस्टम को और प्रभावी बनाया जाए। सरकारी भवनों को सोलर रूफ टॉप अंतर्गत लाया जाए। एलईडी उपकरणों की बाजार में मांग का विश्लेषण कर उसी अनुरूप इनके प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए। हरिद्वार व ऊधमसिंहनगर में बिजली चोरी को रोकने के लिए दो थानों को प्राधिकृत कर दिया जाए। मुख्यमंत्री सचिवालय में ऊर्जा विभाग की सीएम डेशबोर्ड ‘उत्कर्ष’ में केपीआई के आधार पर समीक्षा कर रहे थे।
बैठक में सचिव राधिका झा ने बताया कि जल विद्युत परियोजनाओं से इस वर्ष 13.5 मेगावाट क्षमता की वृद्धि हो जाएगी। अगले छः माह में सरकारी कार्यालयों में 25 किलोवाट तक के प्री-पैड मीटर लगा दिए जाएंगे। जिन क्षेत्रों में विद्युत हानि अधिक है वहां ओपेक्स मॉडल पर स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। ऊर्जा विभाग में 10 केपीआई लिए गए हैं। इसमें 13 हाइड्रो पो्रजेक्ट से 4700 मिलियन यूनिट उत्पादन के सापेक्ष 4663 मिलियन यूनिट उत्पादन किया जा रहा है। 2.25 लाख घरों की मीटरिंग के लक्ष्य के सापेक्ष 2.32 लाख घरों की मीटरिंग की जा चुकी है। एटी एंड सी हानियों को 16.53 प्रतिशत तक लाया जा चुका है। इसे 14 प्रतिशत तक लाया जाना है। 7.76 लाख एलईडी बल्ब का वितरण किया जा चुका है। औसत बिजली उपलब्धता ग्रामीण क्षेत्रों में 23.20 घंटे प्रतिदिन व शहरी क्षेत्रों में 23.35 घंटे है। बिलिंग एफिशिएंसी 85.78 प्रतिशत की जा चुकी है। सौर ऊर्जा की 148.85 मेगावाट की परियोजनाएं आवंटित की जा चुकी हैं। पिरूल नीति के अंतर्गत 675 कि0वा0 की परियोजना आवंटित की जा चुकी हैं। बैठक में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव अमित नेगी, सौजन्या व अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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