देहरादून। भारत की सबसे बड़ी एजुकेशनल फर्नीचर बनाने वाली कंपनी, पॉपकॉर्न फर्नीचर ने कोविड-19 के बाद स्कूलों के द्वारा सामना की जाने वाली समस्याओं पर एक वैबिनार आयोजित किया’। डेढ़ घंटे तक चलने वाले इस वैबिनार में भारत और विदेश के चार पैनलिस्ट्स ने भाग लिया। इस सेशन का आयोजन उन समस्याओं पर चर्चा करने के लिए किया गया था, जिनका स्कूलों को लॉकडाउन के बाद सामना करना पड़ रहा है और स्कूल इंडस्ट्री को संस्थानों को खोलने में पेश आ रही जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसमें लॉकडाउन के बाद शिक्षा के क्षेत्र में आने वाले महीनों में होने वाले परिवर्तनों और और आगे के तौर-तरीके को शामिल किया गया। इस वैवबिनार में टीचरों, प्रिंसिपलों, स्कूल के मालिकों, स्कूल के ट्रस्टियों, सलाहकारों, आर्किटेक्ट्स और मीडिया सहित लगभग 700 लोगों ने भाग लिया। दर्शकों में भारत, यू.ए.ई., दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, ओमान और कतर के प्रख्यात शिक्षाविद शामिल थे।
पॉपकॉर्न फर्नीचर की संस्थापिका और निदेशिका, दीपिका गोयल ने वैबिनार का संचालन किया। नूपुर गोयनका, निदेशक, जी.डी. गोयनका ग्रुप, डॉ. स्वाति पोपट वत्स, अध्यक्षा, अर्ली चाइल्डहुड एसोसिएशन- इंडिया, फातेमा अगरकर, निदेशिका ए.सी.ई. ग्रुप और एंडी लियोन्स, निदेशक, इग्नाइट स्कूल दुबई इस सेशन के लिए पैनलिस्ट्स थे। वैबिनार के दौरान जिन मुख्य बातों पर चर्चा की गई, उनमें शामिल थीं कि किस तरह से स्कूलों को अपने आधारभूत ढाँचे को दोबारा व्यवस्थित करना होगा ताकि सामाजिक दूरी संभव हो सके, माता-पिता और स्कूल के प्रबंधकों के बीच विश्वास की समस्यायें, सरकार के द्वारा शिक्षा उद्योग की मदद के लिए उठाए जा सकने वाले कदम और वर्तमान में जिन आर्थिक तनावों का स्कूलों को सामना करना पड़ रहा है उससे वे कैसे निपटें।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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