नैनीताल। कुमाऊं विवि की 1974 में स्थापना के बाद से 1992 तक की करीब दो लाख छात्र-छात्राओं की डिग्रियां विश्वविद्यालय की अलमारियों में सड़ रही हैं। 1992 के बाद से अब तक की कई लाख और डिग्रियां इसी तरह विश्वविद्यालय की फाइलों में धूल फांक रही हैं। इन हालातों से नाराज कुलपति प्रो. केएस राणा ने विश्वविद्यालय परीक्षा अनुभाग की समीक्षा कर इन डिग्रियों को सम्बंधित छात्र-छात्राओं तक पहुंचाने के लिए वेबपोर्टल बनाने के निर्देश दिए। ताकि पुरातन छात्र-छात्राएं अपनी डिग्रियों के लिए ऑन लाइन आवेदन कर सकें और वे विश्वविद्यालय के चक्कर लगाने से बच सकें। यह डिग्रियां विश्वविद्यालय की आय का भी जरिया हो सकती हैं।
समीक्षा बैठक में कुलपति ने कहा कि 19932 तक बन चुकी दो लाख डिग्रियां अलमारियों में पड़ी हैं जिसके लिये छात्र-छात्राओं की लापरवाही व विश्वविद्यालय की अनदेखी जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को डिग्री देना विश्वविद्यालय की नैतिक जिम्मेदारी है। यह डिग्रियां यदि पुरातन छात्र-छात्राओं तक पहुंच पाती हैं तो उन पुरातन छात्रों को विश्वविद्यालय के विकास की मुख्य धारा में जोड़ा जा सकेगा। यह पुरातन छात्र देश दुनिया में फैले हैं। कुलपति के इन दिशा-निर्देशों के बाद परीक्षा अनुभाग के अधिकारियों की बैठक में तय हुआ कि इस माह के दूसरे हफ्ते तक वेबपोर्टल तैयार कर लिया जाएगा। इस पोर्टल में छात्र-छात्राएं अपनी डिग्री के लिए ऑनलाइन कर सकेंगे। शुरुआत में 1992 तक कि डिग्रियां जो कि बनकर तैयार हैं का वितरण होगा। बैठक में उप कुलसचिव परीक्षा, डीआईसी व विश्वविद्यालय ऑन लाइन पेमेंट गेटवे के पार्टनर एचडीएफसी बैंक के आईटी डिवीजन के अधिकारी मौजूद थे।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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