देहरादून। देशभर में सफल परीक्षणों और हालिया लॉन्च के बाद केंद्र सरकार ने सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम (Cell Broadcast Alert System) को अगले आदेश तक अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब उत्तराखंड समेत देश के कई हिस्सों में मानसून की शुरुआत होने वाली है और आपदा प्रबंधन एजेंसियां संभावित जोखिमों को लेकर सतर्क हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक आपदा के समय कुछ ही सेकंड में लाखों लोगों तक चेतावनी संदेश पहुंचाने में सक्षम है। ऐसे में इसके निलंबन को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

क्या है सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम?

सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम एक आधुनिक मोबाइल नेटवर्क आधारित चेतावनी तकनीक है, जिसके माध्यम से किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में मौजूद सभी मोबाइल उपयोगकर्ताओं को एक साथ आपदा संबंधी अलर्ट भेजे जा सकते हैं।

पारंपरिक एसएमएस सेवा के विपरीत, इस प्रणाली में व्यक्तिगत मोबाइल नंबरों की आवश्यकता नहीं होती। प्रशासन किसी प्रभावित क्षेत्र को चिन्हित करता है और उस क्षेत्र में मौजूद सभी मोबाइल उपकरणों पर एक साथ चेतावनी संदेश प्रसारित कर सकता है।

सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम की प्रमुख विशेषताएं

  • इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता नहीं।
  • 2G, 3G, 4G और 5G नेटवर्क पर कार्य करने की क्षमता।
  • भारी नेटवर्क ट्रैफिक के दौरान भी प्रभावी संदेश प्रसारण।
  • कुछ ही सेकंड में लाखों लोगों तक अलर्ट पहुंचाने की सुविधा।
  • स्थान आधारित (Location-Based) चेतावनी प्रणाली।

मानसून से पहले उत्तराखंड में क्यों बढ़ी चिंता?

उत्तराखंड देश के सबसे अधिक आपदा प्रभावित राज्यों में गिना जाता है। यहां मानसून के दौरान भूस्खलन, बादल फटना, अचानक बाढ़ और नदी-नालों के जलस्तर में वृद्धि जैसी घटनाएं आम हैं।

वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा, चमोली और उत्तरकाशी की कई प्राकृतिक आपदाओं ने यह साबित किया है कि समय पर मिलने वाली चेतावनी हजारों लोगों की जान बचा सकती है। ऐसे में सेल ब्रॉडकास्ट जैसी आधुनिक तकनीक को आपदा प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था।

क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा था यह सिस्टम?

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), दूरसंचार विभाग (DoT), गृह मंत्रालय और सी-डॉट (C-DOT) पिछले कई वर्षों से ऐसी तकनीक विकसित करने पर काम कर रहे थे जो संभावित आपदा क्षेत्र में मौजूद लोगों तक तत्काल चेतावनी पहुंचा सके। मई 2026 में इस सेवा को देशभर में लॉन्च किया गया था। लॉन्च के दौरान इसे भारत की आपदा चेतावनी प्रणाली को अधिक प्रभावी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया गया था।

सरकार ने सेवा पर रोक क्यों लगाई?

फिलहाल सेल ब्रॉडकास्ट सेवा को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है। हालांकि इसके पीछे के विस्तृत कारणों पर आधिकारिक स्तर पर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि तकनीकी समीक्षा, सिस्टम अनुकूलन या संचालन संबंधी पहलुओं की जांच के बाद आगे का निर्णय लिया जा सकता है।

कैसे काम करता है यह सिस्टम?

उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह प्रणाली लोकेशन आधारित अलर्ट मॉडल पर कार्य करती है। जब किसी क्षेत्र में आपदा की आशंका होती है, तो संबंधित एजेंसी उस क्षेत्र के मोबाइल नेटवर्क टावरों के माध्यम से वहां मौजूद सभी मोबाइल उपकरणों पर चेतावनी संदेश प्रसारित कर सकती है। इस प्रक्रिया में न तो मोबाइल नंबरों की सूची की आवश्यकता होती है और न ही इंटरनेट कनेक्टिविटी की।

भविष्य की आपदा चेतावनी प्रणाली पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक भविष्य में भारत की आपदा चेतावनी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। फिलहाल इसकी अस्थायी रोक को लेकर विभिन्न राज्यों और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों की नजर केंद्र सरकार के अगले निर्णय पर बनी हुई है। विशेष रूप से उत्तराखंड जैसे संवेदनशील राज्यों में इस तकनीक की भूमिका भविष्य में और अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम को भारत की आधुनिक आपदा चेतावनी व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि माना जा रहा था। मानसून से ठीक पहले इस सेवा का निलंबन कई सवाल खड़े करता है। आने वाले दिनों में सरकार और संबंधित एजेंसियों के अगले कदम यह तय करेंगे कि यह तकनीक देश की आपदा प्रबंधन प्रणाली में कब और किस रूप में दोबारा शामिल होगी।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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