हल्द्वानी। अधिवक्ता परिषद देवभूमि (उत्तराखण्ड) के प्रथम प्रांत अधिवेशन का उद्घाटन सत्र शनिवार को हल्द्वानी स्थित एफ.टी.आई. परिसर में भव्य, गरिमामय एवं राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत वातावरण में सम्पन्न हुआ। प्रदेशभर से पहुंचे सैकड़ों अधिवक्ताओं, विधि विशेषज्ञों, पदाधिकारियों एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में आयोजित इस महत्वपूर्ण अधिवेशन ने उत्तराखण्ड के विधिक परिदृश्य में एक नए अध्याय की शुरुआत की। अधिवेशन का मुख्य विषय “सुलभ न्याय, समाज की सुरक्षा, उत्तराखण्ड की विधिक चुनौतियाँ एवं अधिवक्ता के दायित्व” रखा गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ भारत सरकार के केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, उत्तर क्षेत्र संगठन मंत्री श्रीहरि बोरेकर, प्रदेश अध्यक्षा जानकी सूर्या, क्षेत्रीय संयोजक विपिन त्यागी तथा अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर माँ भारती, भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रख्यात विचारक दत्तोपंत ठेंगड़ी के चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया गया। अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाना अधिवक्ता समाज का कर्तव्य : श्रीहरि बोरेकर अधिवेशन को संबोधित करते हुए उत्तर क्षेत्र संगठन मंत्री श्रीहरि बोरेकर ने कहा कि अधिवक्ता परिषद वर्ष 1992 में अपनी स्थापना से लेकर आज तक विधिक क्षेत्र में सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियाँ विशेष हैं और पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक न्याय की पहुँच सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को खोजकर उसे न्याय दिलाना अधिवक्ता समाज का सर्वोच्च दायित्व है। बोरेकर ने अधिवक्ताओं से आह्वान किया कि वे समाज में विधिक जागरूकता बढ़ाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं तथा विधि के शासन को मजबूत बनाने में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि हाल ही में लागू किए गए भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सरल और त्वरित बनाया जा सकता है। त्वरित और सुलभ न्याय सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : अर्जुन राम मेघवाल मुख्य अतिथि केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने अपने संबोधन में कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को त्वरित एवं सुलभ न्याय उपलब्ध कराना वर्तमान शासन की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी शासनकाल में बनाई गई दंड संहिता का उद्देश्य दंड देना था, जबकि वर्तमान भारत में लागू किए गए नए आपराधिक कानूनों का उद्देश्य न्याय प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम न्यायिक प्रणाली को अधिक आधुनिक, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। मेघवाल ने कहा कि नई न्याय व्यवस्था में तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। ई-कोर्ट, ई-पोर्टल, ई-एफआईआर, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन और टेली-लॉ जैसी सुविधाओं के माध्यम से आम नागरिकों को न्याय प्राप्त करने में आसानी होगी। उन्होंने कहा कि न्याय में विलम्ब, न्याय से वंचित होने के समान माना जाता है। इसलिए लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही न्यायिक ढांचे को मजबूत बनाने के लिए न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने और न्यायिक सुधारों को गति देने के प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रहित के मुद्दों पर अधिवक्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संविधान के विभिन्न प्रावधानों के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने, न्यायिक सुधारों को गति देने तथा राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर जनभागीदारी सुनिश्चित करने में अधिवक्ताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने गौरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक न्याय जैसे विषयों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में कानून निर्माण और जन-जागरूकता अभियानों में विधि विशेषज्ञों का योगदान आवश्यक है। उन्होंने महिला सशक्तिकरण के संदर्भ में कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने “नारी शक्ति वंदन” का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व प्रदान करना विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव का विकल्प नहीं अपने संबोधन में अर्जुन राम मेघवाल ने इंडस्ट्री 4.0 और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते प्रभाव पर भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता रोजगार समाप्त करने के बजाय रोजगार के स्वरूप और अवसरों में परिवर्तन लाएंगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता कभी भी मनुष्य की संवेदनशीलता, विवेक और मानवीय मूल्यों का स्थान नहीं ले सकती। इसलिए तकनीकी विकास को मानव कल्याण के साथ जोड़कर देखने की आवश्यकता है। विकसित भारत के निर्माण में न्याय व्यवस्था की अहम भूमिका केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए न्याय व्यवस्था का सुदृढ़, पारदर्शी और त्वरित होना आवश्यक है। उन्होंने परिवार प्रबोधन, सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण को भी राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने अधिवक्ताओं से आह्वान किया कि वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनें और न्याय व्यवस्था के प्रति जनविश्वास को मजबूत करें। संगठन को नई ऊर्जा देगा अधिवेशन : विपिन त्यागी क्षेत्रीय संयोजक विपिन त्यागी ने स्वागत भाषण में कहा कि अधिवक्ता परिषद देवभूमि का प्रथम प्रांत अधिवेशन संगठन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और निर्णायक पड़ाव है। उन्होंने कहा कि यह अधिवेशन केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड में विधिक जागरण और संगठनात्मक सशक्तिकरण की नई शुरुआत है। उन्होंने प्रदेशभर से आए अधिवक्ताओं, पदाधिकारियों और अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस अधिवेशन से संगठन को नई ऊर्जा, नई दिशा और प्रभावी कार्ययोजना प्राप्त होगी, जिसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा। बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं और गणमान्य नागरिकों की रही सहभागिता उद्घाटन सत्र में हल्द्वानी आयोजन समिति के अध्यक्ष पीयूष तिवारी, नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोकसभा क्षेत्र के सांसद अजय भट्ट, प्रदेश अध्यक्षा जानकी सूर्या, प्रदेश महामंत्री अनुज शर्मा सहित प्रदेशभर से आए सैकड़ों अधिवक्ता, संगठन पदाधिकारी एवं नगर के प्रतिष्ठित नागरिक उपस्थित रहे। आगामी सत्रों में होगा व्यापक मंथन अधिवेशन का उद्घाटन सत्र राष्ट्रसेवा, विधिक जागरूकता और त्वरित न्याय के संकल्प के साथ सम्पन्न हुआ। अधिवेशन के आगामी सत्रों में उत्तराखण्ड की विधिक चुनौतियों, न्यायिक सुधारों, संगठनात्मक विषयों, सामाजिक सरोकारों तथा राष्ट्र निर्माण में अधिवक्ताओं की भूमिका पर विस्तृत चर्चा और मंथन किया जाएगा। अधिवक्ता परिषद के इस प्रथम प्रांत अधिवेशन को उत्तराखण्ड के विधिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिससे न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में नई संभावनाएँ विकसित होने की उम्मीद है। Post navigation केदारनाथ हेली सेवा मानसून सीजन के लिए बंद, 1.37 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने उठाया लाभ