हरिद्वार। 135 तरह की वैकल्पिक चिकित्साएं दुनिया भर में उपलब्ध हैं और इनमें से सबसे ज्यादा एक्यूप्रेशर प्रचलित है जो दुनिया की तीसरी सबसे अधिक इस्तेमाल करने वाली थेरेपी आज बन चुकी है। मानव शरीर के मर्म बिंदुओं पर प्रेशर दिया जाता है तो उनसे क्या प्रभाव पड़ता है इसी के ऊपर कुछ वैज्ञानिक चर्चा आज राजस्थान से आए, रावतभाटा कोटा न्यूक्लियर फ्यूल कांपलेक्स में कार्यरत डॉक्टर एम. एल. परिहार नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (एनयूजे) हरिद्वार जनपद इकाई द्वारा आयोजित आधुनिक मानव जीवन एवं रोगों के निदान विषय पर आधारित एक कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
उन्होंने लोगों से आवाहन किया कि वे ऋषि मुनियों द्वारा प्रदत्त भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को अपनाएं क्योंकि वे वैज्ञानिक तथ्यों पर पूर्ण उतरते हैं चाहे वह हस्त मुद्रा हो या आंख देखकर रोग को पहचानने की कला जिसे आज आइरिस थेरेपी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि जो कान पकड़ कर शिक्षक बच्चों को याद दिलाने के लिए सजा देते थे वह भी वैज्ञानिक थी इससे बच्चों की मानसिक शक्ति का विकास होता है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दिव्य फार्मेसी में उप महाप्रबंधक एवं फैक्ट्री मैनेजर एन.सी. शर्मा उपस्थित थे। इस मौके पर डॉ. विशाल गर्ग, बीएचएल के रिटायर्ड जनरल मैनेजर राजीव भटनागर, गीता भटनागर, ए.सी क्वात्रा, वीपी गुप्ता, राकेश मोंगा, रश्मि मोंगा, ऋषिकुल कालेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. वी.के. अग्निहोत्री, डॉ. मंजू अग्निहोत्री, रेनू अरोड़ा, नरेश गुप्ता, देवेन्द्र शर्मा, सुभाष कपिल, प्रदीप शर्मा, अनूप कुमार, सचिन तिवारी, सुमित यशकल्याण, हरीश कुमार सहित सभागार में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग उपस्थित थे।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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