देहरादून। उत्तराखंड में आयुर्वेद विद्यार्थियों का आंदोलन सफल हुआ। 53 दिन के आंदोलन और अनशन के बाद आयुष विभाग की तरफ से वो आदेश जारी हुआ, जिसको लेकर लगातार आंदोलन चला। सीएम के दखल के बाद आयुष सचिव की तरफ से जारी हुए आदेश से स्टूडेंट्स खुश हैं। स्टूडेंट्स को उम्मीद है कि इस बार कॉलेजों को फीस वापस करनी होगी, क्योंकि सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत खुद मामले को लेकर गंभीर हैं। आयुष सचिव के आदेश में आयुर्वेद यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार को कहा गया है कि एक महीने (22 दिसंबर) में सभी 13 प्राइवेट कॉलेजों पर एक्शन लें और हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करवाएं- आदेश में साफ कहा गया है कि अगर कॉलेजों ने हाईकोर्ट का आदेश नहीं माना तो उनके िखलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
अपने आदेश में सचिव ने इस बात का भी जिक्र किया कि पहले भी कॉलेजों को फीस लौटाने को कहा गया, लेकिन किसी ने बात नहीं सुनी। इसका नतीजा ये हुआ कि आयुर्वेद कॉलेज के स्टूडेंट्स ने आंदोलन किया, जो ठीक स्थिति नहीं है। आयुर्वेद फीस विवाद में 13 प्राइवेट कॉलेजों को अपनी मनमानी भारी पड़ी- अब कॉलेजों को स्टूडेंट्स से वसूली गई अवैध फीस वापस करनी होगी। साल 2015 बैच के बाद आयुर्वेद कॉलेजों को स्टूडेंट्स के करीब 80 करोड़ रुपए चुकाने हैं- दरअसल नियम के मुताबिक एक स्टूडेंट की सालाना फीस 80 हजार रुपए है, लेकिन कॉलेजों ने सालाना 2 लाख 15 हजार रुपए वसूले। कॉलेजों की तरफ से पड़ी फीस की इसी मार ने 1 अक्टूबर को आंदोलन की शक्ल ले ली। 53 दिन तक आयुर्वेद कॉलेज के स्टूडेंट्स धरना देते रहे, प्रदर्शन करते रहे और पुतले फूंकते रहे, लेकिन न तो आयुष विभाग, न आयुष मंत्री और न ही आयुर्वेद यूनिवर्सिटी के कानों में जूं रेंगी। फीस विवाद शुरुआत में छोटा मुद्दा लग रहा था, पर दिन बीतने के साथ इसने जोर पकड़ा और कांग्रेस भी विवाद में कूद गई।  बावजूद इसके किसी ने नहीं सुनी। आिखर में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आयुष मंत्री, सचिव, कुलपति और रजिस्ट्रार के साथ बैठक की। उन्होंने 52वें दिन छात्रें को ये साफ कर दिया कि सरकार किसी स्टूडेंट के साथ कुछ गलत नहीं होने देगी।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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