विकासनगर। जौनसार-बावर परगने में वन संपदा की सुरक्षा के लिए बनाई गई वन चौकियां खस्ताहालत में हैं। एक दशक पूर्व जर्जर हो चुकी इन वन चैकियों में कोई भी वन कर्मी नहीं रह रहा है। जिसके चलते यहां वन संपदा की तस्करी का खतरा बना रहता है। आलम यह है वन चैकियों के आसपास उगी झाड़ियों के चलते यहां कई बार वन्य जीवों के आने का खतरा भी बना हुआ है।
वन और वन संपदा की दृष्टि से समृद्ध जौनसार-बावर परगने में वन्य उत्पादों की तस्करी रोकने के लिए साहिया पाटन और कोठा तारली में वर्ष 1960 से 65 के अंतराल में वन चैकियों का निर्माण किया गया था। निर्माण काल से ही इन चैकियों की मरम्मत नहीं होने के कारण जर्जर हो चुकी हैं। इनके छत से पानी टपकने के साथ ही खिड़की, दरवाजे टूट चुके हैं। पिछले एक दशक से इन वन चैकियों में कोई भी कर्मचारी नहीं रह रहा है। वन कर्मियों से विहीन इन चैकियों के क्षेत्र में कोई भी घटना होने पर वन कर्मियों को कालसी मुख्यालय से दौड़ लगानी पड़ती है। ऐसे में कई बार वन उत्पादों की तस्करी करने वाले तस्कर आसानी से फरार हो जाते हैं। जबकि वनों में आग लगने पर भी वन कर्मियों के मौके पर पहुंचने तक बड़ा नुकसान हो जाता है। साहिया नेवी के निवर्तमान प्रधान मोहन लाल शर्मा, सुरेंद्र सिंह चैहान ने बताया कि वन विभाग से कई बार साहिया पाटन और कोठा तारली की वन चैकियों की मरम्मत की मांग कई बार की जा चुकी है। लेकिन वन विभाग यहां के वन उत्पादों की सुरक्षा के प्रति लापरवाह बना हुआ है। डीएफओ चकराता दीपचंद आर्य ने बताया कि क्षतिग्रस्त वन चैकियों की मरम्मत के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। बजट स्वीकृत होते ही निर्माण कार्य शुरु करा दिया जाएगा।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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